ऑपरेशन की पूरी कहानी, बेहद सुरक्षित परिसर में कैसे मारे गए ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई

अमेरिका और इस्राइल के बीच गहरी खुफिया साझेदारी है। इसी की मदद से ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई और अन्य शीर्ष अधिकारियों को निशाना बनाया गया। अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए ने महीनों तक खामेनेई की निगरानी की। जब तेहरान में एक बड़ी बैठक की खुफिया जानकारी मिली, तो अमेरिका और इस्राइल ने हमले का वक्त बदलकर इस मौके का फायदा उठाया।

सबसे पहले संक्षेप में वो बड़ी बातें, जो आपको जाननी चाहिए

हमला: अमेरिका-इस्राइल ने शनिवार सुबह ईरान पर हमला कर दिया। ओमान की मध्यस्थता में बातचीत विफल रहने के बाद यह हमला हुआ। 

सटीक खुफिया जानकारी: सीआईए महीनों से खामेनेई की गतिविधियों और उनके पैटर्न पर नजर रख रही थी।

अचानक बदला प्लान: हमला पहले रात के अंधेरे में होना था, लेकिन शनिवार सुबह की सीक्रेट मीटिंग की खबर मिलते ही समय बदल दिया गया।

निशाने पर कौन थे: खामेनेई के साथ IRGC के चीफ, रक्षा मंत्री और सैन्य परिषद के प्रमुख भी मुख्य टारगेट थे।

हमले की तीव्रता: इस्राइली लड़ाकू विमानों ने खामेनेई के निवास वाले परिसर पर लगभग 30 बम गिराए।

अंत: 86 वर्षीय अयातुल्ला अली खामेनेई मारे गए। वे धर्मगुरु थे, जो 1989 से ईरान के सर्वोच्च नेता के पद पर काबिज थे।

CIA की इस पूरे ऑपरेशन में क्या भूमिका थी?
सीआईए यानी अमेरिका की केंद्रीय खुफिया एजेंसी ने इस ऑपरेशन में सबसे अहम भूमिका निभाई। एजेंसी कई महीनों से अयातुल्लाह खामेनेई की गतिविधियों पर नजर रख रही थी। इस दौरान उसने खामेनेई के ठिकानों और उनकी दिनचर्या के पैटर्न को समझने में धीरे-धीरे महारत हासिल कर ली। सीआईए को पता चला कि शनिवार की सुबह तेहरान के एक प्रमुख सरकारी परिसर में ईरान के शीर्ष अधिकारियों की बैठक होने वाली है। सबसे महत्वपूर्ण जानकारी यह थी कि खामेनेई खुद भी इस बैठक में मौजूद रहने वाले थे। इस इनपुट को तुरंत इस्राइल के साथ साझा किया गया। सीआईए की नजर में यह जानकारी 'हाई फिडेलिटी' (पूरी तरह सटीक) थी।

हमले का समय क्यों बदला गया?
मूल योजना के अनुसार, अमेरिका और इस्राइल रात के अंधेरे में हमला करने वाले थे, लेकिन जैसे ही सीआईए को उस बड़ी बैठक की सूचना मिली, दोनों देशों ने समय बदलने का फैसला किया। ईरान के राष्ट्रपति कार्यालय, सर्वोच्च नेता के दफ्तर और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद, तीनों एक ही परिसर में हैं। यहां शीर्ष नेतृत्व एक साथ मौजूद था। इसलिए हमले की टाइमिंग बदलकर शनिवार सुबह कर दी गई, ताकि एक ही झटके में सबसे बड़ी कामयाबी हासिल की जा सके।
हमला कैसे और कब हुआ?
द न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, इस्राइल में सुबह करीब 6 बजे लड़ाकू विमान अपने ठिकानों से उड़े। हमले में विमानों की संख्या अपेक्षाकृत कम थी, लेकिन वे लंबी दूरी की और अत्यंत सटीक मिसाइलों से लैस थे। विमानों के उड़ान भरने के ठीक दो घंटे पांच मिनट बाद तेहरान के समयानुसार सुबह करीब 9 बजकर 40 मिनट पर मिसाइलें उस बेहद सुरक्षित सरकारी परिसर पर जा गिरीं। इस्राइली रक्षा अधिकारी ने बाद में बताया कि ईरान ने युद्ध की तैयारी कर रखी थी। इसके बावजूद इस्राइल इस हमले में 'टैक्टिकल सरप्राइज' हासिल करने में कामयाब रहा।

क्या खामेनेई उसी इमारत में थे, जहां बाकी अधिकारी?
उस परिसर की एक इमारत में ईरान के शीर्ष राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारी बैठे थे, जबकि खामेनेई उसी परिसर की एक अलग लेकिन पास की इमारत में थे। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, खामेनेई के ठिकाने की पहचान होते ही इस्राइली लड़ाकू विमानों ने उस परिसर पर 30 बम गिराए।

ईरान के सैन्य और खुफिया तंत्र को कितना नुकसान हुआ?
ऑपरेशन के बारे में जानकारी रखने वाले लोगों के अनुसार, ईरान की खुफिया एजेंसियों का वरिष्ठ नेतृत्व बड़े पैमाने पर तबाह हो गया। हालांकि, ईरान का शीर्ष खुफिया अधिकारी बच निकलने में कामयाब रहा। शुरुआती हमले के बाद और भी स्थानों पर हमले किए गए, जहां ईरान के खुफिया अधिकारी ठहरे हुए थे। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA ने रविवार को एडमिरल शमखानी और मेजर जनरल पाकपूर की मौत की पुष्टि की। ये वही दो नाम थे, जिनके मारे जाने का इस्राइल ने दावा किया था।

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